लेकिन आपको ध्यान रखना होगा कि उन्ही विषयों पर आर्टिकल्स लिखें जिसमे आपको उस विषय में एक्सपर्ट प्राप्त हो. ऐसे भारी-भरकम दिखावा में आकर कोई ऐसी सब्जेक्ट ना लें, जिस विषय पर आपको बाद में लिखना मुश्किल हो. आप उन्हीं चीजों पर लिखें जिसमें आप जानते हैं, तथा आपका उसमें लगातार इंटरेस्ट बना रहे लिखने के लिये. ब्लॉगिंग करने के लिए आपको ज्यादा कुछ करने की जरूरत नहीं है.


आज की इस ऑनलाइन लाइफस्टाइल में इंटरनेट यूजर्स की संख्या बहुत ही तेज़ी से बढ़ी है और ऑनलाइन शॉपिंग से लेकर ऑनलाइन बिजनेस करने तक के ढेरों विकल्प अब हमारे सामने आ गये हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा ये है कि अगर आपके पास एक यूनिक आईडिया है तो आप अपना ऑनलाइन बिजनेस बड़ी आसानी से शुरू कर सकते हैं और इस ऑनलाइन बिजनेस में कम इन्वेस्टमेंट के बावजूद भी आप कुछ ही समय में एक अच्छा अमाउंट कमा सकते हैं। ऐसे में आज बात करते हैं ऑनलाइन पैसे कैसे कमाएं और इसके लिए कौनसे विकल्प मौजूद हैं।
 यदि आपके पास वेबसाइट या YouTube चैनल है. तो आपको किसी ई-कॉमर्स वेबसाइट से Affiliate प्रोग्राम को join करना होगा. उसके बाद आपको Affiliate प्रोग्राम से Affiliate लिंक प्राप्त होंगे. जिनको आप अपने वेबसाइट के आर्टिकल या फिर वीडियो के डिस्क्रिप्शन में suggest के रूप में दे सकते हैं. यदि उस लिंक से किसी भी प्रोडक्ट की सेल होती है. तो आपको उस प्रोजेक्ट का निर्धारित कमीशन मिल जाएगा. इस तरीके से आप ऑनलाइन अच्छी खांसी इनकम प्राप्त कर सकते हैं.
आप ब्लॉगिंग (Blogging) से साथ साथ अफिलीयेट मार्केटिंग से भी पैसे कमा सकते हैं. जब आप ब्लॉगिंग कर गूगल एड्सेंस (Google Adsense) से पैसे कमा सकते हैं तो अफिलीयेट (Affiliate marketing) आपके लिए इससे भी आसान होगा. क्यूंकी गूगल एड्सेंस से पैसे कमाने का मतलब है की आपके ब्लॉग मैं अच्छा ख़ासा ट्रॅफिक आता है. तो ऐसे में आप किस चीज़ का इंतजार कर सकते हैं जल्दी से टॉप अफिलीयेट नेटवर्क्स में अप्लाइ करें और अपने ब्लॉग में अफिलीयेट से पैसे कमायें. अफिलीयेट मतलब बिना इनवेस्टमेंट के पैसे कामना Online without Investment Paise Kaise Kamaye.

एक पारंपरिक भारतीय व्यवस्था में गुरु-शिष्य का रिश्ता एक बहुत ही पवित्र रिश्ता माना जाता था, जहाँ गुरु या शिक्षक अपने छात्रों में, आध्यात्मिक, वैदिक, नैतिक और अकादमिक शिक्षाओं को संचारित करते थे। गुरु शब्द का अर्थ एक अंधेरे में फंसे हुए व्यक्ति को ज्योतिमान करना (गु का अर्थ है, अंधकार और रू का अर्थ प्रकाश) है। संपूर्ण उस समय शिक्षा का उद्देश्य उच्च नैतिक महत्व से संतुलित व्यक्तित्व में तथा अज्ञानता को एक ज्ञानता में बदलना होता था। इसके बदले में छात्र अपने गुरुओं के घर के कार्यों में सहायता करते थे और जो समर्थ होता था वह गुरू दक्षिणा के रूप में धन का भुगतान करता था। यह पारस्परिक संबंध शिक्षक के ज्ञान और छात्र की आज्ञाकारिता पर आधारित था। ऐसे गुरु-शिष्य संबंध में, एक सक्षम गुरु के कंधों पर सब कुछ छोड़ दिया जाता था, जो एक निर्माता के रूप में अभिनय करके, अपने शिष्यों या छात्रों को एक नई आकृति प्रदान करता था।
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