URL Shortener का मतलब होता है किसी भी URL को short या छोटा कर देना. अब आप सोच रहे होंगे की URL को short करने की क्या जरुरत है और इससे पैसे कैसे कमाया जा सकता है. वैसे आपका सोचना भी बिलकुल ही जायज है. तब इसका जवाब है की लम्बे और बड़े URL किसी को भी पसंद नहीं होते हैं. ऐसे में अगर आप किसी के साथ कोई Link share करना भी चाहें तब भी आपको बड़े URL से जरुर घृणा होगी. ऐसे में URL Shortener बहुत ही ज्यादा काम आते हैं.
अगर आप एक Programmer हैं और आपको Apps Design और Coding(Java, C++) करना आता है तो आप अपना खुद का App बना कर बहुत पैसे कमा सकते हैं। बस आपको एक ज़बर्स्दस्त App बनाने की ज़रुरत है और उसे Google Play या App Store पर Publish कर दीजिये। आप अपने App को Pay Per Download भी बना सकते हैं या Admob Ads से पैसे भी कमा सकते हैं। आप मोबाइल फ़ोन के लिए Ebook App भी बना सकते हैं और उसे App store पर बेच सकते हैं।
हाइ ट्रॅफिक वाले शब्दों (Keywords) का चयन करें और उनमें ब्लॉग पोस्ट लिखें फिर हर एक ब्लॉग पोस्ट को Social Media Platform जैसे Facebook, Twitter, Google पर Promote Share और promote करें इससे आपके ब्लॉग में ट्रॅफिक बढ़ेगा और आपका revenue भी बढ़ेगा. आप अपने ब्लॉग में कई अफिलीयेट मार्केटिंग कंपनियों के अफिलीयेट लिंक लगा कर उनके प्रॉडक्ट्स प्रमोट कर सकते हैं. भारत मेी कई टॉप अफिलीयेट कंपनीज़ Top ­Affiliate Companies in India हैं जिनमें Amazon Shopping, Godaddy, Flipkart, Makemytrip, Yatra, Hostgator Hosting, Ebay, Bluehost Hosting, , Ebay Shopping etc. इन कंपनीज़ के लिए आप अफिलीयेटिंग मार्केटिंग  कर सकते है और ऑनलाइन पैसे कमा सकते हैं Affilaite marketing se paise kamaye
इन रिकॉर्ड्स में मेडिकल हिस्ट्री व फिजिकल रिपोर्ट, क्लिनिक रिपोर्ट, ऑफिस नोट्स, ऑपरेटिव नोट्स, कंसल्टेशन नोट्स, डिस्चार्ज समरी, मनोचिकित्सक आकलन, पैथोलॉजी-लैब रिपोर्ट व एक्सरे रिपोर्ट(Medical History, Physical Report, Clinical Report, Office Notes, Operative Notes, Consultation Notes, Discharge Summary, Psychiatrist Assessment, Pathological and Lab Reports and X-Ray Reports) इत्यादि शामिल हैं।

आपकी साइट जैसे जैसे पॉपुलर होते जाएगी वैसे वैसे ज्यादा लोग आपकी साइट पर विजिट करेंगे | जब कोई इंसान गूगल सर्च पर कोई बात सर्च करता है और यह बात सर्च करने के बाद आपकी साइट अगर ऊपर आती है तो आपने समझ जाना है कि आपकी साइट गूगल के बौट पर सही पोजीशन पर है | जिसके कारण कोई भी अननोन इंसान किसी भी बात को सर्च करने के बाद जो साइट पहले नंबर पर आती है उस पर क्लिक करता है |


इन रिकॉर्ड्स में मेडिकल हिस्ट्री व फिजिकल रिपोर्ट, क्लिनिक रिपोर्ट, ऑफिस नोट्स, ऑपरेटिव नोट्स, कंसल्टेशन नोट्स, डिस्चार्ज समरी, मनोचिकित्सक आकलन, पैथोलॉजी-लैब रिपोर्ट व एक्सरे रिपोर्ट(Medical History, Physical Report, Clinical Report, Office Notes, Operative Notes, Consultation Notes, Discharge Summary, Psychiatrist Assessment, Pathological and Lab Reports and X-Ray Reports) इत्यादि शामिल हैं।
अभी तक भले ही आप अपने आइडियाज को लांच करने में झिझक महसूस करते आये हों लेकिन अब आप जान चुके हैं कि ऑनलाइन बिज़नेस वो ऑप्शन है जिसमें आपको बहुत ज्यादा इन्वेस्ट करने की जरुरत नहीं है। थोड़ा पैसा और थोड़ा समय इन्वेस्ट करके भी आप इस बिजनेस को शुरू कर सकते हैं और अपने यूनिक आइडियाज और क्रिएटिव टैलेंट के दम पर आप इस बिजनेस को किस मुकाम पर ले जा सकते हैं, ये तो आपके अपने हाथ में है।

बातचीत का अभाव, स्वार्थी उद्देश्य और लाभ, ये सभी शिक्षक-छात्र संबंधों के हिस्से में नहीं होते हैं, क्योंकि ये संबंध स्वार्थी हितों से अलग होते हैं। इन सभी के लिए कोई अवधि नहीं होती है। लेकिन कुछ दिन पहले, मैंने एक समाचार पत्र पढ़ा था जिसमें मैंने जो कुछ भी सोचा था वह उसके विपरीत ही था। ठाकुर विद्या मंदिर विद्यालय के एक प्रधानाचार्य और शिक्षक ने अपने पूर्व छात्रों को अपनी पत्नी की हत्या के लिए 50, 000 रुपये दिए। प्राधानाचार्य अपनी पत्नी को मारना चाहते थे, क्योंकि उनकी पत्नी ने उन पर उसी स्कूल की महिला छात्रों के साथ संबंध रखने के लिए संदेह किया था। उन छात्रों ने उनकी पत्नी को मार दिया और उनका शव फेंकने से पहले उसके शरीर को टुकड़ों में काट दिया था। जिसने निर्दयता की सीमा को पार कर दिया। नैतिक महत्व और मानकों में भी गिरावट आ गयी है, इस कारण अच्छे संबंध भी अप्रभावित नहीं टिक पा रहे हैं। हमें ऐसे शिक्षकों के बारे में विचार करना होगा, जो नैतिक मान्यता को स्थापित करने की बजाय इस तरह के अनैतिक संबंधों और ऐसे कुकर्मों को करते हैं। शिक्षकों और छात्रों के बारे में इस तरह की अधिक से अधिक खबरें आ रही हैं, हमें इस तथ्य से सहमत होना होगा कि शिक्षा का नैतिक मूल्य से कोई लेना देना नहीं है और इस तथ्य को भी सुनिश्चित करना होगा कि शिक्षक-छात्र संबंध की परिभाषा बदल रही है या बिगड़ रही है।
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