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अपना इंटेरेस्ट जानने का आसान तारीक़ यह है की आप बहुत ही शांत और आराम से अपने दिमाग से सोचो की आपको सबसे ज्यादा क्या पसंद है। आपका क्या शौक है? किस काम को करने में आपका ज्याद ध्यान लगता है. ऐसा कौन सा काम है जो आप आसानी से कर सकते हैं और जिसमे आप आप अपने दोस्तों या घर वालो की मदद ले सकते है. आप किसी भी चीज़ में अपनी योग्यता साबित कर सकते हैं. अप अपने इंटेरेस्ट के हिसाब से नीचे दी गयी चीज़ों में से आप किसी मैं भी राइटिंग, अफिलीयेट या वीडियो क्रियेशन कर सकते हैं.

इंटरनेट मार्केटिंग – इंटरनेट के इस ज़माने में मार्केटिंग में भी इंटरनेट की मदद की ज़रूरत पड़ती है। ऐसे में डिजिटल मार्केटिंग या इंटरनेट मार्केटिंग एक बहुत बड़ा एरिया बन गया है क्योंकि इंटरनेट पर मौजूद हर एक कंपनी या वेबसाइट को इस इंटरनेट मार्केटिंग का सहारा लेना ही पड़ता है। प्रोडक्ट्स, सर्विसेज, वेबसाइट, एप्प की ऑनलाइन मार्केटिंग का तरीका है इंटरनेट मार्केटिंग, जिसे बहुत आसानी से और कम समय में सीखा जा सकता है।
बातचीत का अभाव, स्वार्थी उद्देश्य और लाभ, ये सभी शिक्षक-छात्र संबंधों के हिस्से में नहीं होते हैं, क्योंकि ये संबंध स्वार्थी हितों से अलग होते हैं। इन सभी के लिए कोई अवधि नहीं होती है। लेकिन कुछ दिन पहले, मैंने एक समाचार पत्र पढ़ा था जिसमें मैंने जो कुछ भी सोचा था वह उसके विपरीत ही था। ठाकुर विद्या मंदिर विद्यालय के एक प्रधानाचार्य और शिक्षक ने अपने पूर्व छात्रों को अपनी पत्नी की हत्या के लिए 50, 000 रुपये दिए। प्राधानाचार्य अपनी पत्नी को मारना चाहते थे, क्योंकि उनकी पत्नी ने उन पर उसी स्कूल की महिला छात्रों के साथ संबंध रखने के लिए संदेह किया था। उन छात्रों ने उनकी पत्नी को मार दिया और उनका शव फेंकने से पहले उसके शरीर को टुकड़ों में काट दिया था। जिसने निर्दयता की सीमा को पार कर दिया। नैतिक महत्व और मानकों में भी गिरावट आ गयी है, इस कारण अच्छे संबंध भी अप्रभावित नहीं टिक पा रहे हैं। हमें ऐसे शिक्षकों के बारे में विचार करना होगा, जो नैतिक मान्यता को स्थापित करने की बजाय इस तरह के अनैतिक संबंधों और ऐसे कुकर्मों को करते हैं। शिक्षकों और छात्रों के बारे में इस तरह की अधिक से अधिक खबरें आ रही हैं, हमें इस तथ्य से सहमत होना होगा कि शिक्षा का नैतिक मूल्य से कोई लेना देना नहीं है और इस तथ्य को भी सुनिश्चित करना होगा कि शिक्षक-छात्र संबंध की परिभाषा बदल रही है या बिगड़ रही है।
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