ऑनलाइन पैसे कमाने की शुरुआत करने के लिए ब्लॉगिंग सबसे अच्छा तरीका है। आप Blogger या Wix जैसे फ्री blogging platform पर अपना खुद का मुफ्त बनलॉग बना सकते हैं और 6 माह बाद AdSense अकाउंट के अप्‍लाई कर अच्छे-खासे पैसे कमाना शुरू कर सकते हैं। ब्लॉगिंग बहुत ही आसान है और सबसे बढ़िया बात यह हैं की यह काम अपनी नौकरी करते हुए पार्ट टाइम अपने मन मर्जी से कर सकते हैं।

अपना इंटेरेस्ट जानने का आसान तारीक़ यह है की आप बहुत ही शांत और आराम से अपने दिमाग से सोचो की आपको सबसे ज्यादा क्या पसंद है। आपका क्या शौक है? किस काम को करने में आपका ज्याद ध्यान लगता है. ऐसा कौन सा काम है जो आप आसानी से कर सकते हैं और जिसमे आप आप अपने दोस्तों या घर वालो की मदद ले सकते है. आप किसी भी चीज़ में अपनी योग्यता साबित कर सकते हैं. अप अपने इंटेरेस्ट के हिसाब से नीचे दी गयी चीज़ों में से आप किसी मैं भी राइटिंग, अफिलीयेट या वीडियो क्रियेशन कर सकते हैं.


अभी सबसे महत्वपूर्ण सवाल. website से पैसे कैसे कमाते है. तो देखिये, दोस्तों! सबसे पहले इस बात को जनलो. दुनिया में जितने भी websites है. उनका कमाने का मुख्य तरीका विज्ञापान ही है. हमें खुदका blog बनाने के उसपर ad लगाने पड़ेंगे. Ads के लिये, google adsense को apply करना पड़ता है. जो की online advertisement कंपनी है. जब हमारी application approval होती है. तब जाके हमारे site पर विज्ञापन show होते है. और जब कोई विजिटर हमारे website को visit करके, show होने वाले ad पर click करता है. तो हमें per click पैसे मिलते है.
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इंटरनेट पर बहुत सारे वेबसाइट हैं, जहां आप अपने बनाए हुए वीडियो को अपलोड कर घर बैठे पैसे कमाने के तरीके में बहुत मजेदार है. तथा वहा से एक अच्छी आमदनी अर्न कर सकते हैं. वीडियो बनाना पैसा कमाने का एक अच्छा साधन बन सकता है. जिस सब्जेक्ट पर आप वीडियो बनाना चाहते हैं, तो उसके लिए पहले आपको एक सब्जेक्ट को चुनाव करना पड़ेगा. उसी सब्जेक्ट एक के ऊपर रहते हुए हर एक वीडियो को फोकस करना होगा.
समय के साथ-साथ, महिला समूहों ने आत्मविश्वास विकसित की और अधिक धन की बचत शुरू कर दी। स्व-सहायता समूहों को जूट बैग बनाने का प्रशिक्षण दिया गया और जो महिलाएँ सिलाई में निपुण थीं, उन्होंने स्वयं को जूट के बैग बनाने के लिए नियोजित किया। इस उद्यम में, केवीके ने उन्हें डिजाइनर बैग बनाने, ब्लॉक प्रिंटिंग आदि पर प्रशिक्षण प्रदान करके मूल्यवर्धन में मदद की। इस बीच, जिले में पॉलीथिन बैग पर प्रतिबंध के कारण, समूह ने खुद को गैर-बुना पर्यावरण के अनुकूल बैग के उत्पादन में प्रशिक्षित किया, जो उस समय उच्च मांग पर थे। इसलिए, इसने अन्य महिलाओं को भी समूह में शामिल होने और विभिन्न पहलुओं पर काम शुरू करने का रास्ता दिखाया।
एक पारंपरिक भारतीय व्यवस्था में गुरु-शिष्य का रिश्ता एक बहुत ही पवित्र रिश्ता माना जाता था, जहाँ गुरु या शिक्षक अपने छात्रों में, आध्यात्मिक, वैदिक, नैतिक और अकादमिक शिक्षाओं को संचारित करते थे। गुरु शब्द का अर्थ एक अंधेरे में फंसे हुए व्यक्ति को ज्योतिमान करना (गु का अर्थ है, अंधकार और रू का अर्थ प्रकाश) है। संपूर्ण उस समय शिक्षा का उद्देश्य उच्च नैतिक महत्व से संतुलित व्यक्तित्व में तथा अज्ञानता को एक ज्ञानता में बदलना होता था। इसके बदले में छात्र अपने गुरुओं के घर के कार्यों में सहायता करते थे और जो समर्थ होता था वह गुरू दक्षिणा के रूप में धन का भुगतान करता था। यह पारस्परिक संबंध शिक्षक के ज्ञान और छात्र की आज्ञाकारिता पर आधारित था। ऐसे गुरु-शिष्य संबंध में, एक सक्षम गुरु के कंधों पर सब कुछ छोड़ दिया जाता था, जो एक निर्माता के रूप में अभिनय करके, अपने शिष्यों या छात्रों को एक नई आकृति प्रदान करता था।
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