आज के ज़माने में affiliate marketing कमाई करने का सबसे popular तरीका बन गया है. आप सोच रहे होंगे. आखिर affiliate marketing हे क्या? वो तो इस link के माध्याम से समझ सकते है. फिर भी अगर किसी e-commerce website को उसके product बेचने में help करना. जैसे amazon, flipkart, snapdeal etc. प्रोडक्ट्स बेचने में help करना और बदलेमे उनसे commission लेना. इसी पूरी process को affiliate marketing कहते है.
हाइ ट्रॅफिक वाले शब्दों (Keywords) का चयन करें और उनमें ब्लॉग पोस्ट लिखें फिर हर एक ब्लॉग पोस्ट को Social Media Platform जैसे Facebook, Twitter, Google पर Promote Share और promote करें इससे आपके ब्लॉग में ट्रॅफिक बढ़ेगा और आपका revenue भी बढ़ेगा. आप अपने ब्लॉग में कई अफिलीयेट मार्केटिंग कंपनियों के अफिलीयेट लिंक लगा कर उनके प्रॉडक्ट्स प्रमोट कर सकते हैं. भारत मेी कई टॉप अफिलीयेट कंपनीज़ Top ­Affiliate Companies in India हैं जिनमें Amazon Shopping, Godaddy, Flipkart, Makemytrip, Yatra, Hostgator Hosting, Ebay, Bluehost Hosting, , Ebay Shopping etc. इन कंपनीज़ के लिए आप अफिलीयेटिंग मार्केटिंग  कर सकते है और ऑनलाइन पैसे कमा सकते हैं Affilaite marketing se paise kamaye
अभी तक भले ही आप अपने आइडियाज को लांच करने में झिझक महसूस करते आये हों लेकिन अब आप जान चुके हैं कि ऑनलाइन बिज़नेस वो ऑप्शन है जिसमें आपको बहुत ज्यादा इन्वेस्ट करने की जरुरत नहीं है। थोड़ा पैसा और थोड़ा समय इन्वेस्ट करके भी आप इस बिजनेस को शुरू कर सकते हैं और अपने यूनिक आइडियाज और क्रिएटिव टैलेंट के दम पर आप इस बिजनेस को किस मुकाम पर ले जा सकते हैं, ये तो आपके अपने हाथ में है।
ऑनलाइन सामान बेचना – अगर आप किसी प्रोडक्ट को बनाने में महारत रखते हैं और आपको सिर्फ ऐसे प्लेटफार्म की जरुरत है जहाँ आपके प्रोडक्ट को लाखों लोग देख सके और खरीद सके तो इसके लिए आप ई-कॉमर्स वेबसाइट पर ऑनलाइन सेलर के रूप में अपने प्रोडक्ट्स बेच सकते हैं। ऐसा करने पर आप बिना खर्च के, लाखों लोगों तक अपने प्रोडक्ट्स की पहुँच बना पाएंगे और अपने प्रोडक्ट्स को ऑनलाइन बेचकर काफी अच्छा पैसा कमा सकेंगे।
एक पारंपरिक भारतीय व्यवस्था में गुरु-शिष्य का रिश्ता एक बहुत ही पवित्र रिश्ता माना जाता था, जहाँ गुरु या शिक्षक अपने छात्रों में, आध्यात्मिक, वैदिक, नैतिक और अकादमिक शिक्षाओं को संचारित करते थे। गुरु शब्द का अर्थ एक अंधेरे में फंसे हुए व्यक्ति को ज्योतिमान करना (गु का अर्थ है, अंधकार और रू का अर्थ प्रकाश) है। संपूर्ण उस समय शिक्षा का उद्देश्य उच्च नैतिक महत्व से संतुलित व्यक्तित्व में तथा अज्ञानता को एक ज्ञानता में बदलना होता था। इसके बदले में छात्र अपने गुरुओं के घर के कार्यों में सहायता करते थे और जो समर्थ होता था वह गुरू दक्षिणा के रूप में धन का भुगतान करता था। यह पारस्परिक संबंध शिक्षक के ज्ञान और छात्र की आज्ञाकारिता पर आधारित था। ऐसे गुरु-शिष्य संबंध में, एक सक्षम गुरु के कंधों पर सब कुछ छोड़ दिया जाता था, जो एक निर्माता के रूप में अभिनय करके, अपने शिष्यों या छात्रों को एक नई आकृति प्रदान करता था।
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