URL Shortener का मतलब होता है किसी भी URL को short या छोटा कर देना. अब आप सोच रहे होंगे की URL को short करने की क्या जरुरत है और इससे पैसे कैसे कमाया जा सकता है. वैसे आपका सोचना भी बिलकुल ही जायज है. तब इसका जवाब है की लम्बे और बड़े URL किसी को भी पसंद नहीं होते हैं. ऐसे में अगर आप किसी के साथ कोई Link share करना भी चाहें तब भी आपको बड़े URL से जरुर घृणा होगी. ऐसे में URL Shortener बहुत ही ज्यादा काम आते हैं.

समय के साथ-साथ, महिला समूहों ने आत्मविश्वास विकसित की और अधिक धन की बचत शुरू कर दी। स्व-सहायता समूहों को जूट बैग बनाने का प्रशिक्षण दिया गया और जो महिलाएँ सिलाई में निपुण थीं, उन्होंने स्वयं को जूट के बैग बनाने के लिए नियोजित किया। इस उद्यम में, केवीके ने उन्हें डिजाइनर बैग बनाने, ब्लॉक प्रिंटिंग आदि पर प्रशिक्षण प्रदान करके मूल्यवर्धन में मदद की। इस बीच, जिले में पॉलीथिन बैग पर प्रतिबंध के कारण, समूह ने खुद को गैर-बुना पर्यावरण के अनुकूल बैग के उत्पादन में प्रशिक्षित किया, जो उस समय उच्च मांग पर थे। इसलिए, इसने अन्य महिलाओं को भी समूह में शामिल होने और विभिन्न पहलुओं पर काम शुरू करने का रास्ता दिखाया।

उदाहरण के तौर पर जब आप इसी वेबसाइट जैसे makehindi.com को ओपन करते हो तो इस पोस्ट के ऊपर नीचे विज्ञापन लगे होते है जब आप इनके विज्ञापन पर क्लिक करते है तो makehindi.com को इससे पैसे मिलते है. इसी तरह आप भी कर सकते हैं. आप अपनी खुद की वेबसाइट बनाकर उस पर गूगल ऐडसेन्स से विज्ञापन लगवा सकते है और वेबसाइट से पैसे कमा सकते हो. बता दे कि वेबसाइट से करोड़ों लोग करोड़ों रूपये कमा रहे है.

जबकि प्रकाशन उद्योग प्रिंट में भारी हुआ करता था, आप इन दिनों ऑनलाइन ही किताब लिखने, प्रकाशन और मार्केटिंग की पूरी प्रक्रिया को पूरा कर सकते हैं। Create Space जैसी वेबसाइट आपको एक औपचारिक प्रकाशक को शामिल किए बिना प्रिंट करने के लिए आपकी पुस्तक को अपलोड करने देती हैं, और आप अपनी पुस्तक Amazon.com पर भी उपलब्ध कर सकते हैं ताकि लोग इसे वहां से खरीद सकें।
गुजरात के सूरत शहर के एक छात्र ने प्रधानमंत्री और गुजरात के मुख्‍यमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी पर अपनी पीएचडी थिसिस को पूरा कर उसे सबमिट कर दिया है। इस छात्र का नाम सुनेंगे तो आप चौंक जाएंगे। डॉक्‍टरेट के इस स्‍टूडेंट का नाम मेहुल चोकसी है। मजेदार बात है कि इस छात्र का नाम भी भगोड़े हीरा व्‍यापारी की तरह मेहुल चोकसी है, जिस पर बैंकों का हजारों करोड़ रुपये लेकर भाग जाने का आरोप है।
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लेकिन अब हम आपको मोबाइल ऐप से पैसा कमाने के तरीके बताएंगे | सबसे पहले हम आपको एक उदाहरण देंगे, दोस्तों हम देखते हैं कि ऑनलाइन फूड ऑर्डर कंपनी जैसे स्विगी, जोमैटो और ऑनलाइन कार रेंटल कंपनी जैसे कि ओला कैब उबर एप्स | यह सारी कंपनी एक छोटे से ऐप का इस्तेमाल करके ही पैसा कमाती है, सबसे बड़ी कंपनी के मालिक के दिमाग में आई कि हम लोगों को घर पर बैठकर खाना दे सकते हैं |
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बातचीत का अभाव, स्वार्थी उद्देश्य और लाभ, ये सभी शिक्षक-छात्र संबंधों के हिस्से में नहीं होते हैं, क्योंकि ये संबंध स्वार्थी हितों से अलग होते हैं। इन सभी के लिए कोई अवधि नहीं होती है। लेकिन कुछ दिन पहले, मैंने एक समाचार पत्र पढ़ा था जिसमें मैंने जो कुछ भी सोचा था वह उसके विपरीत ही था। ठाकुर विद्या मंदिर विद्यालय के एक प्रधानाचार्य और शिक्षक ने अपने पूर्व छात्रों को अपनी पत्नी की हत्या के लिए 50, 000 रुपये दिए। प्राधानाचार्य अपनी पत्नी को मारना चाहते थे, क्योंकि उनकी पत्नी ने उन पर उसी स्कूल की महिला छात्रों के साथ संबंध रखने के लिए संदेह किया था। उन छात्रों ने उनकी पत्नी को मार दिया और उनका शव फेंकने से पहले उसके शरीर को टुकड़ों में काट दिया था। जिसने निर्दयता की सीमा को पार कर दिया। नैतिक महत्व और मानकों में भी गिरावट आ गयी है, इस कारण अच्छे संबंध भी अप्रभावित नहीं टिक पा रहे हैं। हमें ऐसे शिक्षकों के बारे में विचार करना होगा, जो नैतिक मान्यता को स्थापित करने की बजाय इस तरह के अनैतिक संबंधों और ऐसे कुकर्मों को करते हैं। शिक्षकों और छात्रों के बारे में इस तरह की अधिक से अधिक खबरें आ रही हैं, हमें इस तथ्य से सहमत होना होगा कि शिक्षा का नैतिक मूल्य से कोई लेना देना नहीं है और इस तथ्य को भी सुनिश्चित करना होगा कि शिक्षक-छात्र संबंध की परिभाषा बदल रही है या बिगड़ रही है।
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