श्यामा देवी अब स्वयं की कोशिश की बदौलत केवीके तथा आरएसईटीआई, शंकरपुर देहरादून से प्रशिक्षित होकर पेशेवर महिला बन गई हैं, क्योंकि वह न केवल अपने समूह की महिलाओं को सिखाती और शिक्षित करती हैं, बल्कि उत्तराखंड के विभिन्न जिलों की महिलाओं को भी सिखाती है। वह ओबीसी, आरएसईटीआई में मास्टर ट्रेनर है। एक सफल गृहिणी से लेकर एक सफल उद्यमी और एक विश्वसनीय परामर्शदाता तक, फतेहपुर गाँव की श्यामा देवी की कहानी एक प्रेरणादायक कहानी है कि कैसे ग्रामीण भारत की महिलाएँ अपने भाग्य को संभाल सकती हैं। श्यामा, एक महिला जो एक समय में अपनी दैनिक जरूरतों और अपने बच्चों की फीस का भुगतान करने में सक्षम नहीं थी, आज एक कार के साथ एक घर की मालकिन है।
YouTube,Blogging की तरह है जिसमें आपको वीडियो मैं किसी टॉपिक के बारे में आप अपना experience शेयर कर सकते हैं बस YouTube और ब्लॉगिंग में यही अंतर है कि आप ब्लॉगिंग में लिखकर अपने बातों को लोगों के साथ शेयर कर सकते हैं और YouTube में उसे वीडियो बनाकर आप लोगों को  अपने बात को शेयर कर सकते हैं और फिर इस पर ऐड लगाकर आप online money earn कर सकते हैं | [caption id="attachment_122" align="aligncenter" width="406"]                          make money youtube[/caption]  

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समय के साथ-साथ, महिला समूहों ने आत्मविश्वास विकसित की और अधिक धन की बचत शुरू कर दी। स्व-सहायता समूहों को जूट बैग बनाने का प्रशिक्षण दिया गया और जो महिलाएँ सिलाई में निपुण थीं, उन्होंने स्वयं को जूट के बैग बनाने के लिए नियोजित किया। इस उद्यम में, केवीके ने उन्हें डिजाइनर बैग बनाने, ब्लॉक प्रिंटिंग आदि पर प्रशिक्षण प्रदान करके मूल्यवर्धन में मदद की। इस बीच, जिले में पॉलीथिन बैग पर प्रतिबंध के कारण, समूह ने खुद को गैर-बुना पर्यावरण के अनुकूल बैग के उत्पादन में प्रशिक्षित किया, जो उस समय उच्च मांग पर थे। इसलिए, इसने अन्य महिलाओं को भी समूह में शामिल होने और विभिन्न पहलुओं पर काम शुरू करने का रास्ता दिखाया।

प्रकृति में सक्रिय होने के कारण श्यामा देवी ने महिला जागृति समूह की स्थापना और शुरुआत की। अपने गाँव के महिला समूह के बीच आर्थिक बाधाओं और स्वतंत्रता की कमी की समस्याओं को महसूस करने पर, श्यामा देवी ने दृढ़ता से अपना पक्ष रखा और महिला स्व-सहायता समूहों पर कृषि विज्ञान केंद्र और ब्लॉक अधिकारियों द्वारा संबोधित की जाने वाली महिलाओं के एक समूह में शामिल हो गईं। केवीके और अन्य संबंधित विभागों से जानकारी इकट्ठा करके, श्यामा ने इन समूहों के बारे में अपनी साथी महिला ग्रामीणों को शिक्षित करने के लिए अपनी यात्रा शुरू की।
यदि आप एक अच्छे विडियो क्रिएटर बन जाते हैं, तो एक आप एक अच्छी इनकम कर सकते हैं. यूट्यूब येसा ही ऑनलाइन प्लेटफार्म प्रदान करता है, जहां से आप अपने वीडियो को क्रिएट कर अपलोड कर सकते हैं. यदि आपके विडियो के उपर एक अच्छा ट्रैफिक आने लगता है, तो यूट्यूब आपके चैनल को मोनेटाइजेशन कर देता है, यानि आपकी वीडियो पर यूट्यूब उस पर विज्ञापन दिखाना शुरु कर देता है.
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लेकिन आज का परिदृश्य अब पहले की तरह नहीं रहा। यह पूरी तरह से बदल गया है। स्कूल जा रहे बच्चों के साथ, छेड़छाड़ और बलात्कार जैसे मामले और अन्य स्कूल संबंधी अपराधों के कई आत्मघाती मामले स्पष्ट रूप से दर्शा रहे हैं कि बहुत कुछ बदल चुका है। अगर हम समाचार पत्रों की हेडलाइंसों को देखते हैं तो हमें इस प्रकार की कई सुर्खियां दिखाई पड़ती हैं। चेन्नई में एक 10 वीं कक्षा की छात्रा ने शिक्षक द्वारा पिटाई और निर्वस्त्र होने से क्षुब्ध होकर आत्महत्या कर ली थी। दिल्ली में एक शिक्षक द्वारा एक छात्र पर डस्टर फेंकने के कारण उस छात्र ने अपनी आँखे खो दीं थीं और हाल यह हो गया है कि छात्र भी अपने शिक्षकों को नहीं छोड़ते। अपने शिक्षकों को मारने वाले छात्रों की खबरों को भी पूरे भारत में सुना गया है। कुछ अमीर छात्र बहुत ही अक्खड़ होते हैं और वे पैसों के घमंड़ में आकर अपने शिक्षकों का सम्मान भी नहीं करते हैं तथा अपने गुरू की बात पर ध्यान भी नहीं देते, कि वे क्या कह रहे हैं।
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