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अपने सपनों को साकार करने और जीवन में वित्तीय स्थिरता और स्वतंत्रता के महत्त्व के बारे में महिलाओं को शिक्षित करने के लिए के लिए श्यामा ने लगातार चार महीनों तक कई बैठकें कीं। श्यामा देवी द्वारा किए गए कभी न खत्म होने वाले प्रयासों के परिणामस्वरूप फतेहपुर गाँव की 10 महिला सदस्यों के साथ महिला जागृति समूह 19 सितंबर, 2012 को अपने आधिकारिक रूप में सामने आई। समूह का उद्देश्य था कि गाँव की महिलाएँ अपनी आजीविका के लिए कुछ पैसा कमाएँ। इसने महिला समूहों को बचत के रूप में 100 रुपए प्रति माह की राशि का योगदान दिया।
लेकिन आज का परिदृश्य अब पहले की तरह नहीं रहा। यह पूरी तरह से बदल गया है। स्कूल जा रहे बच्चों के साथ, छेड़छाड़ और बलात्कार जैसे मामले और अन्य स्कूल संबंधी अपराधों के कई आत्मघाती मामले स्पष्ट रूप से दर्शा रहे हैं कि बहुत कुछ बदल चुका है। अगर हम समाचार पत्रों की हेडलाइंसों को देखते हैं तो हमें इस प्रकार की कई सुर्खियां दिखाई पड़ती हैं। चेन्नई में एक 10 वीं कक्षा की छात्रा ने शिक्षक द्वारा पिटाई और निर्वस्त्र होने से क्षुब्ध होकर आत्महत्या कर ली थी। दिल्ली में एक शिक्षक द्वारा एक छात्र पर डस्टर फेंकने के कारण उस छात्र ने अपनी आँखे खो दीं थीं और हाल यह हो गया है कि छात्र भी अपने शिक्षकों को नहीं छोड़ते। अपने शिक्षकों को मारने वाले छात्रों की खबरों को भी पूरे भारत में सुना गया है। कुछ अमीर छात्र बहुत ही अक्खड़ होते हैं और वे पैसों के घमंड़ में आकर अपने शिक्षकों का सम्मान भी नहीं करते हैं तथा अपने गुरू की बात पर ध्यान भी नहीं देते, कि वे क्या कह रहे हैं।
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