तो चलिए हमारे इस आर्टिकल के जरिये हम आपको घर भैते पैसे कमाने के बारे में विस्तार से बताएंगे| क्या आपको पता हैं की घर बैठे कमाई करना कोई मुश्किल काम नहीं हैं| आज के समय में सब काम ऑनलाइन हो गया हैं| डिजिटल इंडिया की वजह से आज हर काम बहुत आसान हो गया हैं| बहुत से ऐसे ऑनलाइन तकनीक हैं जिसकी वजह से आप घर पर भैते ही ऑनलाइन पैसे कमा सकते हैं| इसके लिए आपको कोई अलग स्किल आने की जरुरत नहीं हैं| अगर आपको कंप्यूटर ऑपरेट करना आता हैं और आप कंप्यूटर पेकाम केर सकते हैं तो इसकी मदत से आप ऑनलाइन पैसे कमा सकते हैं| बहुत सी ऐसी कपोनी हैं जो ऑनलाइन अपना काम दुसरो से करवाती है| इसे फ्रीलान्स कहते हैं| आप चाहे तो ऑनलाइन अपना किसी चीज़ पर राइटिंग करके वो कंटेंट ऑनलाइन किसी वेबसाइट को बेच सकते हैं इससे वो वेबसीटे इसके बदले आपको पैसे देती हैं|
सामान बेचने के लिए आपको थोडा Marketing Skill सीखना पड़ेगा (जिससे आप अपने items को औरों से अच्छा बता सकते हैं). इसके विषय में आपको internet से जानकारी प्राप्त हो सकती है. यहाँ पर आपको दुसरे seller को थोडा study करना होगा की वो किस प्रकार से अपने चीज़ों के विषय में लिखते हैं, क्या price रखते हैं और कैसे उन चीज़ों का promotion करते हैं. इससे आप अपने brand की value को भी बढ़ा सकते हैं. इस काम में आप अपने friends और relatives की भी सहायता ले सकते हैं और उनसे पुरानी चीज़ें collect कर सकते हैं.
इंटरनेट पर बहुत सारे वेबसाइट हैं, जहां आप अपने बनाए हुए वीडियो को अपलोड कर घर बैठे पैसे कमाने के तरीके में बहुत मजेदार है. तथा वहा से एक अच्छी आमदनी अर्न कर सकते हैं. वीडियो बनाना पैसा कमाने का एक अच्छा साधन बन सकता है. जिस सब्जेक्ट पर आप वीडियो बनाना चाहते हैं, तो उसके लिए पहले आपको एक सब्जेक्ट को चुनाव करना पड़ेगा. उसी सब्जेक्ट एक के ऊपर रहते हुए हर एक वीडियो को फोकस करना होगा.

वेबसाइट को मोनेटाइजेशन के लिए सबसे अच्छा तरीका गूगल का एडसेंस प्रोग्राम है, जो विश्व का सबसे बढ़िया एड प्रोग्राम है. गूगल का एडसेंस आपके वेबसाइट के आर्टिकल पर विज्ञापन दिखाता है, जहां से घर बैठे पैसे कमाने के तरीके में बहुत ज्यादा पॉपुलर है. घर बैठे एक अच्छी इनकम कर सकते हैं. तो आप एक वेबसाइट कैसे शुरु करें और कैसे बनाएं इसके लिए बहुत सारे वीडियो भी यूट्यूब पर अवेलेबल है.
एक पारंपरिक भारतीय व्यवस्था में गुरु-शिष्य का रिश्ता एक बहुत ही पवित्र रिश्ता माना जाता था, जहाँ गुरु या शिक्षक अपने छात्रों में, आध्यात्मिक, वैदिक, नैतिक और अकादमिक शिक्षाओं को संचारित करते थे। गुरु शब्द का अर्थ एक अंधेरे में फंसे हुए व्यक्ति को ज्योतिमान करना (गु का अर्थ है, अंधकार और रू का अर्थ प्रकाश) है। संपूर्ण उस समय शिक्षा का उद्देश्य उच्च नैतिक महत्व से संतुलित व्यक्तित्व में तथा अज्ञानता को एक ज्ञानता में बदलना होता था। इसके बदले में छात्र अपने गुरुओं के घर के कार्यों में सहायता करते थे और जो समर्थ होता था वह गुरू दक्षिणा के रूप में धन का भुगतान करता था। यह पारस्परिक संबंध शिक्षक के ज्ञान और छात्र की आज्ञाकारिता पर आधारित था। ऐसे गुरु-शिष्य संबंध में, एक सक्षम गुरु के कंधों पर सब कुछ छोड़ दिया जाता था, जो एक निर्माता के रूप में अभिनय करके, अपने शिष्यों या छात्रों को एक नई आकृति प्रदान करता था।
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