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 आपने पिछले कुछ सालों से नोटिस किया होगा, जैसे जैसे इंटरनेट यूजर्स ज्यादा बढ़ रहे है. वैसे वैसे ही Online Jobs भी बढ़ रही है. लेकिन कुछ सही तरीकों से ज्यादा ऑनलाइन स्कैम भी तेजी से बढ़ रहे हैं. मैं यह नहीं चाहता कि आप किसी Online स्कैम का शिकार बने. यहां मैं आपसे उन पांच तरीकों के बारे में बात करूंगा, जो पूरी तरह से सुरक्षित है और पूरी तरह से वर्क करते हैं. इन तरीकों का इस्तेमाल करके आप इंटरनेट से अच्छा पैसे और कैरियर दोनों बना सकते हैं. तो चलिए जानते है, उन 5 तरीकों के बारे में. जिनको आप इस्तेमाल करके आसानी से ऑनलाइन पैसे कमा सकते हैं.
मान लीजिए कि आपको कोई स्मार्टफोन लेना है। और मैं आपको एक लिंक दूंगा और बोलूंगा क्लिक करके आप खरीद लेना। और आप स्मार्टफोन खरीदोगे तो जिस कंपनी का स्मार्टफोन होगा जहां से खरीदोगे वहां से कम मिलेंगे। जो कि अच्छे खासे कमिशन होते हैं। इसके लिए भी आपको एक अच्छे प्लेटफार्म चाहिए जैसे कि, Blogger, Youtube, Social Networking Sites जहां पर आप एक बार में अच्छे खासे Sell करा पाए। ज्यादा जानकारी के लिए नीचे पोस्ट का लिंक दे रहे हैं वह जरूर पढ़ें। 🙂
श्यामा ग्राम फतेहपुर, ब्लॉक विकासनगर, जिला देहरादून से संबंध रखती हैं। वह श्री त्रिलोक सिंह की विवाहिता है और एक हाउस-वाइफ (गृहस्वामिनी) है। श्यामा ऐसे गाँव में रहती हैं, जहाँ अशिक्षित होने के अलावा, महिलाओं को अपने पति की अनुमति के बिना अपने घरों से बाहर कदम रखने की भी अनुमति नहीं थी। यही हाल श्यामा का भी था, जिनके पति शराबी होने के कारण परिवार की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए भी पर्याप्त पैसा नहीं कमा पाते थे। अपनी मर्जी से श्री त्रिलोक से शादी करने के कारण, श्यामा का परिवार भी उनकी आर्थिक मदद करने से पीछे हटा रहा। फिर, वह समय आया जब श्री त्रिलोक को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा और उसके परिवार के लिए सब कुछ टूट गया। स्थिति यहाँ तक ​​बिगड़ गई कि उन्हें अपने अस्तित्व के लिए अपना घर भी बेचना पड़ा। यहाँ तक ​​कि उनके बच्चों को स्कूल की फीस का भुगतान न कर पाने के कारण उन्हें स्कूलों से निकाल दिया गया।  

कुछ माता-पिता अपने बच्चों पर बहुत अधिक ध्यान देते हैं और हमेशा यदि वे  कुछ गलत करें तो उन्हें रोकते हैं। लेकिन कुछ माता-पिता अपने बच्चों को उन सम्मानों को नहीं सिखाते हैं जो उन्हें अपने शिक्षकों को देना चाहिए। कुछ माता-पिता अपने बच्चों को महंगे फोन और अन्य ऐसे गैजेट (यंत्र) भी दे देते हैं जिससे वे अकड़ कर चलते हैं। इसलिए, बहुत से बच्चे अब शिक्षा के लिए, बल्कि केवल पैसे की धौंस दिखाने के लिए स्कूल जा रहे हैं। यही कारण है कि स्कूल जाने वाले बच्चों के साथ एमएमएस जैसी कई अनैतिक घटनाएं हो रही हैं। इसके अतिरिक्त बाहर काम करने वाले माता-पिता के पास अपने बच्चों के लिए समय कम होता है। वे इससे चिंतित रहते हैं कि उनके बच्चे क्या कर रहे हैं और किसके साथ वे अपना समय बिता रहे हैं। माता-पिता अपने समय को छोड़कर अपने बच्चों को सब कुछ देने का प्रयास करते हैं। लेकिन माता-पिता को माहौल के समय के महत्व का एहसास होना चाहिए।
इन रिकॉर्ड्स में मेडिकल हिस्ट्री व फिजिकल रिपोर्ट, क्लिनिक रिपोर्ट, ऑफिस नोट्स, ऑपरेटिव नोट्स, कंसल्टेशन नोट्स, डिस्चार्ज समरी, मनोचिकित्सक आकलन, पैथोलॉजी-लैब रिपोर्ट व एक्सरे रिपोर्ट(Medical History, Physical Report, Clinical Report, Office Notes, Operative Notes, Consultation Notes, Discharge Summary, Psychiatrist Assessment, Pathological and Lab Reports and X-Ray Reports) इत्यादि शामिल हैं।
यूट्यूब पर बहुत सारे लोग दूसरों का मनोरंजन होने के लिए विभिन्न वीडियोस बनाते हैं और यूट्यूब पर अपलोड करते हैं | कई बार बहुत सारे वीडियोस ऐसे होते हैं जो बेहतरीन होने के कारण ट्रेंडिंग पर आ जाते हैं | जो वीडियो ट्रेंडिंग पर होता है उस वीडियो के कारण उस चैनल का मालिक आसानी से लाखों रुपए कमा लेता है, यूट्यूब पर काम करते समय आपका मनोरंजन होने के साथ-साथ आपको शोहरत भी मिलती है |
बातचीत का अभाव, स्वार्थी उद्देश्य और लाभ, ये सभी शिक्षक-छात्र संबंधों के हिस्से में नहीं होते हैं, क्योंकि ये संबंध स्वार्थी हितों से अलग होते हैं। इन सभी के लिए कोई अवधि नहीं होती है। लेकिन कुछ दिन पहले, मैंने एक समाचार पत्र पढ़ा था जिसमें मैंने जो कुछ भी सोचा था वह उसके विपरीत ही था। ठाकुर विद्या मंदिर विद्यालय के एक प्रधानाचार्य और शिक्षक ने अपने पूर्व छात्रों को अपनी पत्नी की हत्या के लिए 50, 000 रुपये दिए। प्राधानाचार्य अपनी पत्नी को मारना चाहते थे, क्योंकि उनकी पत्नी ने उन पर उसी स्कूल की महिला छात्रों के साथ संबंध रखने के लिए संदेह किया था। उन छात्रों ने उनकी पत्नी को मार दिया और उनका शव फेंकने से पहले उसके शरीर को टुकड़ों में काट दिया था। जिसने निर्दयता की सीमा को पार कर दिया। नैतिक महत्व और मानकों में भी गिरावट आ गयी है, इस कारण अच्छे संबंध भी अप्रभावित नहीं टिक पा रहे हैं। हमें ऐसे शिक्षकों के बारे में विचार करना होगा, जो नैतिक मान्यता को स्थापित करने की बजाय इस तरह के अनैतिक संबंधों और ऐसे कुकर्मों को करते हैं। शिक्षकों और छात्रों के बारे में इस तरह की अधिक से अधिक खबरें आ रही हैं, हमें इस तथ्य से सहमत होना होगा कि शिक्षा का नैतिक मूल्य से कोई लेना देना नहीं है और इस तथ्य को भी सुनिश्चित करना होगा कि शिक्षक-छात्र संबंध की परिभाषा बदल रही है या बिगड़ रही है।
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