अभी सबसे महत्वपूर्ण सवाल. website से पैसे कैसे कमाते है. तो देखिये, दोस्तों! सबसे पहले इस बात को जनलो. दुनिया में जितने भी websites है. उनका कमाने का मुख्य तरीका विज्ञापान ही है. हमें खुदका blog बनाने के उसपर ad लगाने पड़ेंगे. Ads के लिये, google adsense को apply करना पड़ता है. जो की online advertisement कंपनी है. जब हमारी application approval होती है. तब जाके हमारे site पर विज्ञापन show होते है. और जब कोई विजिटर हमारे website को visit करके, show होने वाले ad पर click करता है. तो हमें per click पैसे मिलते है.
गुजरात के सूरत शहर के एक छात्र ने प्रधानमंत्री और गुजरात के मुख्‍यमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी पर अपनी पीएचडी थिसिस को पूरा कर उसे सबमिट कर दिया है। इस छात्र का नाम सुनेंगे तो आप चौंक जाएंगे। डॉक्‍टरेट के इस स्‍टूडेंट का नाम मेहुल चोकसी है। मजेदार बात है कि इस छात्र का नाम भी भगोड़े हीरा व्‍यापारी की तरह मेहुल चोकसी है, जिस पर बैंकों का हजारों करोड़ रुपये लेकर भाग जाने का आरोप है।

 अगर आप ब्लॉगिंग करना चाहते हैं. तो आप blogger blog से शुरू करिए. जो कि एकदम free of cost है. जब आप अच्छा कमाने लग जाए और आपको एक्स्ट्रा फीचर्स की जरूरत पढ़े तो आप wordpress पर शिफ्ट कर जाएं. जो कि ब्लॉगिंग का paid Platform है. जहां पर आपको कई एडवांस फीचर मिल जाएंगे जो आपके ब्लॉगिंग एक्सपीरियंस को काफी आसान बना देंगे. अगर आप ब्लॉगिंग के बारे में अधिक जानकारी चाहते हैं तो रवि भाई के ब्लॉग anytechinfo पर विजिट कर सकते हैं.

बातचीत का अभाव, स्वार्थी उद्देश्य और लाभ, ये सभी शिक्षक-छात्र संबंधों के हिस्से में नहीं होते हैं, क्योंकि ये संबंध स्वार्थी हितों से अलग होते हैं। इन सभी के लिए कोई अवधि नहीं होती है। लेकिन कुछ दिन पहले, मैंने एक समाचार पत्र पढ़ा था जिसमें मैंने जो कुछ भी सोचा था वह उसके विपरीत ही था। ठाकुर विद्या मंदिर विद्यालय के एक प्रधानाचार्य और शिक्षक ने अपने पूर्व छात्रों को अपनी पत्नी की हत्या के लिए 50, 000 रुपये दिए। प्राधानाचार्य अपनी पत्नी को मारना चाहते थे, क्योंकि उनकी पत्नी ने उन पर उसी स्कूल की महिला छात्रों के साथ संबंध रखने के लिए संदेह किया था। उन छात्रों ने उनकी पत्नी को मार दिया और उनका शव फेंकने से पहले उसके शरीर को टुकड़ों में काट दिया था। जिसने निर्दयता की सीमा को पार कर दिया। नैतिक महत्व और मानकों में भी गिरावट आ गयी है, इस कारण अच्छे संबंध भी अप्रभावित नहीं टिक पा रहे हैं। हमें ऐसे शिक्षकों के बारे में विचार करना होगा, जो नैतिक मान्यता को स्थापित करने की बजाय इस तरह के अनैतिक संबंधों और ऐसे कुकर्मों को करते हैं। शिक्षकों और छात्रों के बारे में इस तरह की अधिक से अधिक खबरें आ रही हैं, हमें इस तथ्य से सहमत होना होगा कि शिक्षा का नैतिक मूल्य से कोई लेना देना नहीं है और इस तथ्य को भी सुनिश्चित करना होगा कि शिक्षक-छात्र संबंध की परिभाषा बदल रही है या बिगड़ रही है।
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