Roz dhan एक Video Sharing aplication है। जिसमें आपको Funny, Entertainment, Health related, dance, Music, Celebs और अन्य बहुत केटेगरी के videos देखने को मिलते हैं। इस एप्लीकशन में आप video share करके पैसा कमा सकते हैं और खुद भी Photos और Videos बनाकर  उसको शेयर करके पैसे कमा सकते है। Roz Dhan App में आपको हिंदी, अंग्रेजी, और तेलुगु भाषा की videos देखने को मिलती हैं और अभी  इस app में और भी भारतीय भाषाओ को जोड़ा जा रहा है ताकि सभी लोग इसका आनंद ले सके।


मुझे लगता है. आपने ब्लॉग्गिंग पहली बार सूना होगा. पहले में इसके बारे में basic जानकरी देता हूँ. तो ब्लॉग्गिंग यानि किसी website को चलाना. पहले is बात को भी जानले. website को ही blog कहते है. लेकिन ब्लॉग में हम हमारा knowledge लोगो के साथ article के रूप में share करते है. जैसे आप अभी पैसा कमाने के तरीके पढ़ रहे है. यह article आप एक blog पर रीड कर रहे है. और में इस website को हैंडल कर रहा हूँ. मतलब इसे daily पड़ते कर रहा हूँ. तो इस प्रोसेस को ही ब्लॉग्गिंग कहते है.
भारत में बहुत लोग बेरोजगार है जिनमे बहुत तो ऐसे है जिन्हें अच्छी पढाई करने के बावजूद भी जॉब नहीं मिल पाती है लेकिन उन लोगो के लिए इन्टरनेट एक बेहतरीन जगह है जहां पैसे कमाने की कोई लिमिट नहीं है अगर आपको इन्टरनेट का थोड़ा बहुत नोलेज है तो भी आप इन्टरनेट से पैसे कमा सकते हैं. यहाँ पर सबसे बड़ी बात ये है की किसी काम के लिए आपसे आपकी कोई पढाई या डिग्री का प्रूफ नहीं माँगा जाता है.
इंटरनेट में आपको ऐसे बहुत सारे वेबसाइट मिल जाएंगे। जहां लोग अपना ऑनलाइन कोर्स लेते हैं। Udemy एक बेहतर प्लेटफॉर्म है आपके नॉलेज को शेयर करने का। यहां रजिस्टर करके आप अपने कंपलीट कोर्स वीडियो और डाक्यूमेंट्स के जरिए अपलोड कर सकते हैं। फिर आपको उस कोर्स की एक Price सेट करना पड़ेगा। जो कोई भी आप का कोर्स लेना चाहेगा वह Udemy के जरिए पेमेंट करके जब और जहां चाहे उसे पढ़ पाएंगे। Udemy कुछ कमीशन रख कर आपको आपका पेमेंट आपके बैंक में दे देता है। 🙂
चोकसी ने वर्ष 2010 में नरेंद्र मोदी के गुजरात के सीएम रहने के दौरान अपने पीएचडी की शुरुआत की थी। उन्‍होंने बताया कि शुरुआती दौर में मोदी के सफल नेतृत्‍व को लेकर सवाल पूछे तो 51 फीसदी का जवाब सकारात्‍मक रहा। वहीं 34.25 फीसदी लोगों ने ना में जवाब दिया। इस दौरान 46.75 फीसदी लोगों ने कहा कि नेताओं को ऐसे फैसले लेने चाहिए जिससे लोगों का भला हो। इससे नेताओं की लोकप्रियता बढ़ती है।
श्यामा ग्राम फतेहपुर, ब्लॉक विकासनगर, जिला देहरादून से संबंध रखती हैं। वह श्री त्रिलोक सिंह की विवाहिता है और एक हाउस-वाइफ (गृहस्वामिनी) है। श्यामा ऐसे गाँव में रहती हैं, जहाँ अशिक्षित होने के अलावा, महिलाओं को अपने पति की अनुमति के बिना अपने घरों से बाहर कदम रखने की भी अनुमति नहीं थी। यही हाल श्यामा का भी था, जिनके पति शराबी होने के कारण परिवार की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए भी पर्याप्त पैसा नहीं कमा पाते थे। अपनी मर्जी से श्री त्रिलोक से शादी करने के कारण, श्यामा का परिवार भी उनकी आर्थिक मदद करने से पीछे हटा रहा। फिर, वह समय आया जब श्री त्रिलोक को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा और उसके परिवार के लिए सब कुछ टूट गया। स्थिति यहाँ तक ​​बिगड़ गई कि उन्हें अपने अस्तित्व के लिए अपना घर भी बेचना पड़ा। यहाँ तक ​​कि उनके बच्चों को स्कूल की फीस का भुगतान न कर पाने के कारण उन्हें स्कूलों से निकाल दिया गया।  
श्यामा देवी अब स्वयं की कोशिश की बदौलत केवीके तथा आरएसईटीआई, शंकरपुर देहरादून से प्रशिक्षित होकर पेशेवर महिला बन गई हैं, क्योंकि वह न केवल अपने समूह की महिलाओं को सिखाती और शिक्षित करती हैं, बल्कि उत्तराखंड के विभिन्न जिलों की महिलाओं को भी सिखाती है। वह ओबीसी, आरएसईटीआई में मास्टर ट्रेनर है। एक सफल गृहिणी से लेकर एक सफल उद्यमी और एक विश्वसनीय परामर्शदाता तक, फतेहपुर गाँव की श्यामा देवी की कहानी एक प्रेरणादायक कहानी है कि कैसे ग्रामीण भारत की महिलाएँ अपने भाग्य को संभाल सकती हैं। श्यामा, एक महिला जो एक समय में अपनी दैनिक जरूरतों और अपने बच्चों की फीस का भुगतान करने में सक्षम नहीं थी, आज एक कार के साथ एक घर की मालकिन है।
एक पारंपरिक भारतीय व्यवस्था में गुरु-शिष्य का रिश्ता एक बहुत ही पवित्र रिश्ता माना जाता था, जहाँ गुरु या शिक्षक अपने छात्रों में, आध्यात्मिक, वैदिक, नैतिक और अकादमिक शिक्षाओं को संचारित करते थे। गुरु शब्द का अर्थ एक अंधेरे में फंसे हुए व्यक्ति को ज्योतिमान करना (गु का अर्थ है, अंधकार और रू का अर्थ प्रकाश) है। संपूर्ण उस समय शिक्षा का उद्देश्य उच्च नैतिक महत्व से संतुलित व्यक्तित्व में तथा अज्ञानता को एक ज्ञानता में बदलना होता था। इसके बदले में छात्र अपने गुरुओं के घर के कार्यों में सहायता करते थे और जो समर्थ होता था वह गुरू दक्षिणा के रूप में धन का भुगतान करता था। यह पारस्परिक संबंध शिक्षक के ज्ञान और छात्र की आज्ञाकारिता पर आधारित था। ऐसे गुरु-शिष्य संबंध में, एक सक्षम गुरु के कंधों पर सब कुछ छोड़ दिया जाता था, जो एक निर्माता के रूप में अभिनय करके, अपने शिष्यों या छात्रों को एक नई आकृति प्रदान करता था।
×