समझ लीजिए आपने किसी जॉब साइट को तैयार किया है और यह साइट बहुत ही जानी मानी है | इस साइट पर दिन भर में हजारों युसर्स आकर आपके पोस्ट देखते हैं | यह पोस्ट देखते समय आप आपके साइट पर गूगल ऐडसेंस के ऐड डाल सकते हो जिन पर क्लिक करके आपको गूगल ऑटोमेटिक पैसा देता है | जब आपके वेबसाइट के विजिटर्स ज्यादा से ज्यादा क्लिक करते हैं वैसे वैसे गूगल आपको पैसे देता है | गूगल ऐडसेंस के द्वारा लाखों रुपए कमाना आसान नहीं होता है, कुछ महीनों तक आपको आपके साइट पर ज्यादा से ज्यादा काम करना होता है |

बच्चे अपने शिक्षकों के साथ एक दिन में 6-7 घंटे बिताते हैं। इस समय के दौरान, शिक्षक बच्चों को न केवल शिक्षा और ज्ञान देते हैं, बल्कि ऐसा व्यक्ति बनाते हैं, जो नैतिक महत्व को स्थापित करे। जोकि विद्यार्थियों द्वारा गृहण किया जाता है। अधिकांश छात्र अपने शिक्षकों को अपना आदर्श मानते हैं। शिक्षक वह है जो अपने छात्रों को एक स्वरूप प्रदान करता है। शिक्षक शब्द अपमान के बदले सम्मान की भावना को प्रकट करता है। वर्तमान-दिनों के शिक्षक-छात्र संबंध को भी प्राचीन भारत के गुरु-शिष्य संबंध की तरह बनाने के लिए हर तरह के प्रयास किए जाने चाहिए।


 यदि आपके पास वेबसाइट या YouTube चैनल है. तो आपको किसी ई-कॉमर्स वेबसाइट से Affiliate प्रोग्राम को join करना होगा. उसके बाद आपको Affiliate प्रोग्राम से Affiliate लिंक प्राप्त होंगे. जिनको आप अपने वेबसाइट के आर्टिकल या फिर वीडियो के डिस्क्रिप्शन में suggest के रूप में दे सकते हैं. यदि उस लिंक से किसी भी प्रोडक्ट की सेल होती है. तो आपको उस प्रोजेक्ट का निर्धारित कमीशन मिल जाएगा. इस तरीके से आप ऑनलाइन अच्छी खांसी इनकम प्राप्त कर सकते हैं.
चोकसी ने वर्ष 2010 में नरेंद्र मोदी के गुजरात के सीएम रहने के दौरान अपने पीएचडी की शुरुआत की थी। उन्‍होंने बताया कि शुरुआती दौर में मोदी के सफल नेतृत्‍व को लेकर सवाल पूछे तो 51 फीसदी का जवाब सकारात्‍मक रहा। वहीं 34.25 फीसदी लोगों ने ना में जवाब दिया। इस दौरान 46.75 फीसदी लोगों ने कहा कि नेताओं को ऐसे फैसले लेने चाहिए जिससे लोगों का भला हो। इससे नेताओं की लोकप्रियता बढ़ती है। 

एक पारंपरिक भारतीय व्यवस्था में गुरु-शिष्य का रिश्ता एक बहुत ही पवित्र रिश्ता माना जाता था, जहाँ गुरु या शिक्षक अपने छात्रों में, आध्यात्मिक, वैदिक, नैतिक और अकादमिक शिक्षाओं को संचारित करते थे। गुरु शब्द का अर्थ एक अंधेरे में फंसे हुए व्यक्ति को ज्योतिमान करना (गु का अर्थ है, अंधकार और रू का अर्थ प्रकाश) है। संपूर्ण उस समय शिक्षा का उद्देश्य उच्च नैतिक महत्व से संतुलित व्यक्तित्व में तथा अज्ञानता को एक ज्ञानता में बदलना होता था। इसके बदले में छात्र अपने गुरुओं के घर के कार्यों में सहायता करते थे और जो समर्थ होता था वह गुरू दक्षिणा के रूप में धन का भुगतान करता था। यह पारस्परिक संबंध शिक्षक के ज्ञान और छात्र की आज्ञाकारिता पर आधारित था। ऐसे गुरु-शिष्य संबंध में, एक सक्षम गुरु के कंधों पर सब कुछ छोड़ दिया जाता था, जो एक निर्माता के रूप में अभिनय करके, अपने शिष्यों या छात्रों को एक नई आकृति प्रदान करता था।
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