गूगल ऐडसेंस एप्रूवल मिलना बहुत कठिन तो नहीं है लेकिन कई बार लोगों को महीनों तक इंतिज़ार करना पड़ सकता है। गूगल ऐडसेंस पहले अकाउंट लेवल एक्शन जल्दी ले लेता था जिससे आपकी ज़रा सी लापरवाही आपकी आमदनी को ख़त्म कर सकती थी। आज गूगल ऐडसेंस एकाउंट लेवल एक्शन लेने की बजाय पेज लेवल एक्शन लेने लगा है लेकिन फिर भी आपको Media.net के बारे में जानकारी रखनी चाहिए और इसपर भी एकाउंट एप्रूव करा लेना चाहिए। ताकि जब ज़रूरत हो तो आप ऐडसेंस की जगह Media.net ads का प्रयोग कर सकें।
आपको यह भी ध्यान रखना चाहिए हैं कि आप हमेशा सभी सर्वेक्षणों में भाग लेने के योग्य नहीं हैं। कुछ सर्वेक्षण अधिक विशिष्ट प्रकार के लोगों की तलाश में हो सकते हैं, और आप मानदंडों में फिट हो सकते हैं या नहीं हो सकते। फिर भी, अपने प्रोफ़ाइल को ठीक से भरें ताकि सर्वेक्षण पैनलों को आपकी बेहतर पहचान करने में मदद मिल सके और संभवत: आपके द्वारा भाग लेने के योग्य सर्वेक्षणों की संख्या में वृद्धि हो।
गुजरात के सूरत शहर के एक छात्र ने प्रधानमंत्री और गुजरात के मुख्‍यमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी पर अपनी पीएचडी थिसिस को पूरा कर उसे सबमिट कर दिया है। इस छात्र का नाम सुनेंगे तो आप चौंक जाएंगे। डॉक्‍टरेट के इस स्‍टूडेंट का नाम मेहुल चोकसी है। मजेदार बात है कि इस छात्र का नाम भी भगोड़े हीरा व्‍यापारी की तरह मेहुल चोकसी है, जिस पर बैंकों का हजारों करोड़ रुपये लेकर भाग जाने का आरोप है।
अगर आपका ऐप एक बहुत ही प्रभावशाली है मतलब लोगों को मदद करने वाला है तो आसानी से लोग प्ले स्टोर में जाकर आपका ऐप डाउनलोड करेंगे जिससे आप आसानी से पैसा कमा सकते हो | बहुत सारे छोटे-छोटे ऐप ऐसे होते हैं जो अपने एप पर गूगल ऐडसेंस की एडवर्टाइजमेंट डालकर लाखों रुपए कमाते हैं | दोस्तों इस तरीके से आप ऑनलाइन ऐप बनाकर करोड़ों रुपए कमा सकते हो, अगर आपको ऑनलाइन पैसा कमाने के बारे में कोई सवाल है तो आप हमें नीचे दिए गए हुए कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हो |
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एक पारंपरिक भारतीय व्यवस्था में गुरु-शिष्य का रिश्ता एक बहुत ही पवित्र रिश्ता माना जाता था, जहाँ गुरु या शिक्षक अपने छात्रों में, आध्यात्मिक, वैदिक, नैतिक और अकादमिक शिक्षाओं को संचारित करते थे। गुरु शब्द का अर्थ एक अंधेरे में फंसे हुए व्यक्ति को ज्योतिमान करना (गु का अर्थ है, अंधकार और रू का अर्थ प्रकाश) है। संपूर्ण उस समय शिक्षा का उद्देश्य उच्च नैतिक महत्व से संतुलित व्यक्तित्व में तथा अज्ञानता को एक ज्ञानता में बदलना होता था। इसके बदले में छात्र अपने गुरुओं के घर के कार्यों में सहायता करते थे और जो समर्थ होता था वह गुरू दक्षिणा के रूप में धन का भुगतान करता था। यह पारस्परिक संबंध शिक्षक के ज्ञान और छात्र की आज्ञाकारिता पर आधारित था। ऐसे गुरु-शिष्य संबंध में, एक सक्षम गुरु के कंधों पर सब कुछ छोड़ दिया जाता था, जो एक निर्माता के रूप में अभिनय करके, अपने शिष्यों या छात्रों को एक नई आकृति प्रदान करता था।

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