ब्लॉगिंग से पैसे कैसे कमाए Blogging se paise kaise kamaye? या फिर ब्लॉग से पैसे कैसे कमाते हैं Blog se kaise paise kamaye. तो इस पोस्ट में हम आपको बताएँगे की आप ब्लॉगिंग से ऑनलाइन कैसे पैसे कमा सकते हो? सबसे पहले ब्लॉगर डॉट कॉम www.blogger.com पर जाए. अपनी ज़िमेल से लोजीन करें. फिर क्रियेट ब्लॉग create blog पर क्लिक करें. अपनी पसंद का डोमेन नाम लिखें और continue करें. फिर अपनी पसंद की टेंपलेट चूज़ करें और फिर सेट्टिंग में जाकर कस्टमाइज़ करें. फिर ब्लॉग पोस्ट (Add post) करें. लगातार ब्लॉग पोस्ट करने से आपके ब्लॉग का ट्रॅफिक भी बढ़ेगा. जब ब्लॉग पूरी तरह कस्टमाइज़ हो जाए और बहुत सारी ब्लॉग पोस्ट हो जाए और अच्छा ट्रॅफिक आने लगे तो आप गूगल एड्सेंस अप्लाइ (Apply Google Adsense) कर सकते हैं. अगर गूगल एड्सेंस अप्रूव्ड (Google Adsense Approved) हो जाए तो फिर आप अपनी ब्लॉग को मोनेटाइज़ (Monetize blog) यानी ब्लॉग में एड लगा सकते हैं. हर बार एड क्लिक होने पर आपको गूगल से पैसे मिलेंगे.
गूगल ऐडसेंस एप्रूवल मिलना बहुत कठिन तो नहीं है लेकिन कई बार लोगों को महीनों तक इंतिज़ार करना पड़ सकता है। गूगल ऐडसेंस पहले अकाउंट लेवल एक्शन जल्दी ले लेता था जिससे आपकी ज़रा सी लापरवाही आपकी आमदनी को ख़त्म कर सकती थी। आज गूगल ऐडसेंस एकाउंट लेवल एक्शन लेने की बजाय पेज लेवल एक्शन लेने लगा है लेकिन फिर भी आपको Media.net के बारे में जानकारी रखनी चाहिए और इसपर भी एकाउंट एप्रूव करा लेना चाहिए। ताकि जब ज़रूरत हो तो आप ऐडसेंस की जगह Media.net ads का प्रयोग कर सकें।
लेकिन आज का परिदृश्य अब पहले की तरह नहीं रहा। यह पूरी तरह से बदल गया है। स्कूल जा रहे बच्चों के साथ, छेड़छाड़ और बलात्कार जैसे मामले और अन्य स्कूल संबंधी अपराधों के कई आत्मघाती मामले स्पष्ट रूप से दर्शा रहे हैं कि बहुत कुछ बदल चुका है। अगर हम समाचार पत्रों की हेडलाइंसों को देखते हैं तो हमें इस प्रकार की कई सुर्खियां दिखाई पड़ती हैं। चेन्नई में एक 10 वीं कक्षा की छात्रा ने शिक्षक द्वारा पिटाई और निर्वस्त्र होने से क्षुब्ध होकर आत्महत्या कर ली थी। दिल्ली में एक शिक्षक द्वारा एक छात्र पर डस्टर फेंकने के कारण उस छात्र ने अपनी आँखे खो दीं थीं और हाल यह हो गया है कि छात्र भी अपने शिक्षकों को नहीं छोड़ते। अपने शिक्षकों को मारने वाले छात्रों की खबरों को भी पूरे भारत में सुना गया है। कुछ अमीर छात्र बहुत ही अक्खड़ होते हैं और वे पैसों के घमंड़ में आकर अपने शिक्षकों का सम्मान भी नहीं करते हैं तथा अपने गुरू की बात पर ध्यान भी नहीं देते, कि वे क्या कह रहे हैं।
बातचीत का अभाव, स्वार्थी उद्देश्य और लाभ, ये सभी शिक्षक-छात्र संबंधों के हिस्से में नहीं होते हैं, क्योंकि ये संबंध स्वार्थी हितों से अलग होते हैं। इन सभी के लिए कोई अवधि नहीं होती है। लेकिन कुछ दिन पहले, मैंने एक समाचार पत्र पढ़ा था जिसमें मैंने जो कुछ भी सोचा था वह उसके विपरीत ही था। ठाकुर विद्या मंदिर विद्यालय के एक प्रधानाचार्य और शिक्षक ने अपने पूर्व छात्रों को अपनी पत्नी की हत्या के लिए 50, 000 रुपये दिए। प्राधानाचार्य अपनी पत्नी को मारना चाहते थे, क्योंकि उनकी पत्नी ने उन पर उसी स्कूल की महिला छात्रों के साथ संबंध रखने के लिए संदेह किया था। उन छात्रों ने उनकी पत्नी को मार दिया और उनका शव फेंकने से पहले उसके शरीर को टुकड़ों में काट दिया था। जिसने निर्दयता की सीमा को पार कर दिया। नैतिक महत्व और मानकों में भी गिरावट आ गयी है, इस कारण अच्छे संबंध भी अप्रभावित नहीं टिक पा रहे हैं। हमें ऐसे शिक्षकों के बारे में विचार करना होगा, जो नैतिक मान्यता को स्थापित करने की बजाय इस तरह के अनैतिक संबंधों और ऐसे कुकर्मों को करते हैं। शिक्षकों और छात्रों के बारे में इस तरह की अधिक से अधिक खबरें आ रही हैं, हमें इस तथ्य से सहमत होना होगा कि शिक्षा का नैतिक मूल्य से कोई लेना देना नहीं है और इस तथ्य को भी सुनिश्चित करना होगा कि शिक्षक-छात्र संबंध की परिभाषा बदल रही है या बिगड़ रही है।
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