तो ऐसे बहुत सारे वेबसाइट से जहां पर आप Article/Post लिख सकते हैं। बहुत ऐसे म्यूजिक वेबसाइट से जो बोलते हैं कि म्यूजिक बना कर देते हैं। तो आपको उसके बदले में कुछ पैसे मिलेंगे। ऐसे ही बहुत सारे आपको काम ऑनलाइन में मिल जाते हैं। म्यूजिक बना सकते हैं। किसी के वेबसाइट पर लिख सकते हैं। किसी के लिए वीडियो बना सकते हैं। अगर आपको वेबसाइट बनाना आता है। तो वेबसाइट बनाने का पैसे ले सकते हैं। पैसे आप दूसरों का काम कर सकते हैं। 🙂

आगे बढ़ने से पहले आपको Contextual Ads को समझ लेना चाहिए। इस प्रकार के विज्ञापन आपके ब्लॉग या वेबसाइट पर मौजूद कंटेंट के कीवर्ड को समझकर विज्ञापन दिखाते हैं यानि अगर आप वेब होस्टिंग के बारे में लिख रहे हैं तो अधिकतर वेब होस्टिंग या उससे संबंधित विज्ञापन दिखाए जाएंगे। इसलिए अगर आपको ब्लॉग और Media.net ads से ज़्यादा से ज़्यादा आमदनी करनी है तो आप अधिक सर्च किए जाने वाले कीवर्ड के साथ उन कीवर्ड्स को चुनें जिन पर CPC या CPM ज़्यादा मिल सके।
यदि आपको फोटो लेने का शौक है और आप बहुत अच्छे फोटोग्राफर हैं, तो आप स्टॉक फोटोग्राफर बनकर अपने फोटोज को ShutterStock या iStockPhoto जैसी स्टॉक फोटो कंपनी को बेचकर ऑनलाइन अतिरिक्त पैसा कमा सकते हैं। जब भी कोई आपके द्वारा सबमिट किया गया फोटो का लाइसेंस देगा, तो आपको हर बार रॉयल्टी मिलेगी। वास्तव में सफल होने के लिए, अपने पोर्टफोलियो का प्रदर्शन करने में सक्षम होने के लिए अपनी खुद की फोटोग्राफी वेबसाइट बनाएं और उच्च-भुगतान वाले निजी कॉर्पोरेट काम करना शुरू करें।

जैसा की मैंने आपको बताया की Roz dhan एक Android Application है, इसलिए आपको सबसे पहले Google play store में जाना होगा और वहाँ  Search करना होगा Roz dhan उसके बाद जो एप्प सबसे पहले नंबर पर आएगी अपने उसको इनस्टॉल कर देना है।  मैं आपको बता दूँ की आजकल fake app भी बहुत सारी हैं। इसलिए मैं  Original Roz dhan App का Download link आपको नीचे दे देता हूँ ताकि आप गलत application download न कर लें।
एक पारंपरिक भारतीय व्यवस्था में गुरु-शिष्य का रिश्ता एक बहुत ही पवित्र रिश्ता माना जाता था, जहाँ गुरु या शिक्षक अपने छात्रों में, आध्यात्मिक, वैदिक, नैतिक और अकादमिक शिक्षाओं को संचारित करते थे। गुरु शब्द का अर्थ एक अंधेरे में फंसे हुए व्यक्ति को ज्योतिमान करना (गु का अर्थ है, अंधकार और रू का अर्थ प्रकाश) है। संपूर्ण उस समय शिक्षा का उद्देश्य उच्च नैतिक महत्व से संतुलित व्यक्तित्व में तथा अज्ञानता को एक ज्ञानता में बदलना होता था। इसके बदले में छात्र अपने गुरुओं के घर के कार्यों में सहायता करते थे और जो समर्थ होता था वह गुरू दक्षिणा के रूप में धन का भुगतान करता था। यह पारस्परिक संबंध शिक्षक के ज्ञान और छात्र की आज्ञाकारिता पर आधारित था। ऐसे गुरु-शिष्य संबंध में, एक सक्षम गुरु के कंधों पर सब कुछ छोड़ दिया जाता था, जो एक निर्माता के रूप में अभिनय करके, अपने शिष्यों या छात्रों को एक नई आकृति प्रदान करता था।
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